Day: June 26, 2026

शरीर / आत्मा

एकेन्द्रिय जीवों से हमारे शरीर की रक्षा/ पालन होता है। विकलेन्द्रियों तथा सकलेन्द्रिय तिर्यंचों के प्रति दया/ रक्षा के भावों से आत्मा की रक्षा। चिंतन

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सेवा

सेवा प्रशंसनीय है, यदि उसमें ममत्व* न हो। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी * धन, प्रतिष्ठा आदि से भी न हो।

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मंगल आशीष

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June 26, 2026