भाव कर्म आदि
सिर्फ़ भाव-कर्म/पूजा/मुनि आदि का महत्त्व नहीं।
भाव सहित कर्म/पूजा/मुनि का महत्त्व होता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
सिर्फ़ भाव-कर्म/पूजा/मुनि आदि का महत्त्व नहीं।
भाव सहित कर्म/पूजा/मुनि का महत्त्व होता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
One Response
भाव कर्म आदि को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु कर्म,पूजा,भुनि का महत्व तभी होता है ,जब हृदय में भाव होना परम आवश्यक है।