मज़ा / आनंद
मज़ा… संसार पर आश्रित। अल्प समय का।
आनंद.. गुरु/ भगवान के निमित्त/ निकटता/ उनकी सेवा करने से।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 8/24)
मज़ा… संसार पर आश्रित। अल्प समय का।
आनंद.. गुरु/ भगवान के निमित्त/ निकटता/ उनकी सेवा करने से।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 8/24)