Day: May 20, 2026

माँगना

कल्पवृक्ष किसी से कुछ नहीं माँगते। जो अपने को मानते हैं/ अपने से ही माँगते हैं, वे ही केवलज्ञानी बनते हैं। क्षु. श्री सहजानन्द जी

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मज़ा / आनंद

मज़ा… संसार पर आश्रित। अल्प समय का। *आनंद.. गुरु/ भगवान के निमित्त/ निकटता/ उनकी सेवा करने से।   मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र –

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मंगल आशीष

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