हिंसा
दसलक्षण धर्म के प्रथम दिवस उत्तम-क्षमा की बधाई,
सबसे क्षमा भाव।
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पार्टी आदि में अनर्गल प्रवृत्ति करते समय सुख लगता है, तो ग़लत क्या ?
आपकी प्रवृत्ति से दूसरों को दु:ख/ अशांति, यह ग़लत हुआ/ हिंसा हुई।
ख़ुद की आत्मा का घात होने से अंतरंग हिंसा भी।
मुनिश्री प्रणम्यसागर जी (तत्वार्थ सूत्र – 7/14)



