सांकृत्यायन जी ने लिखा है…मोक्ष घुमक्कड़ों को ही होता है।
क्योंकि उनका कोई व्यक्तिगत/ स्थायी ठिकाना नहीं होता, बहुत दिन ठहरे पानी में तो कीड़े पड़ जाते हैं।
ब्र. डॉ. निलेश भैया
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मोक्ष को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए मोक्ष की परम आवश्यकता है, लेकिन उसके लिए वैराग्य की भावना होना परम आवश्यक है।
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मोक्ष को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए मोक्ष की परम आवश्यकता है, लेकिन उसके लिए वैराग्य की भावना होना परम आवश्यक है।