रावण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जैन धर्म में रावण को जलाने या देखने का कोई ओचित्य नहीं है। जब निर्वाण कांड पढते है उसमे रावण का नाम आता है, क्योंकि वह शीघ़ तीर्थंकर बनने वाले है। आज के दिन जो बुराईयां ओर अंहकार भरा हुआ है उहको नष्ट करना परम आवश्यक है।
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रावण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जैन धर्म में रावण को जलाने या देखने का कोई ओचित्य नहीं है। जब निर्वाण कांड पढते है उसमे रावण का नाम आता है, क्योंकि वह शीघ़ तीर्थंकर बनने वाले है। आज के दिन जो बुराईयां ओर अंहकार भरा हुआ है उहको नष्ट करना परम आवश्यक है।