लोक
लोक….
जितनी भी गैलेक्सीस् देखी जा सकीं हैं, उनसे बहुत ज्यादा। जितने चाँद, तारे दिख रहे हैं, उनसे असंख्यात् गुणे,
यह हुआ मध्यलोक।
चाँद तारों के ऊपर असंख्यात् ऊँचाई में उर्धलोक।
ऐसे ही इतना ही नीचे अधोलोक।
पूरा आकार मनुष्य का। लोक के बाहर अनन्त तक फैला आलोकाकाश, जिसमें जीव नहीं।
चिंतन



