व्यक्त्ति
साधना की पृष्ठभूमि…….विरक्त्ति,
आराधना की पृष्ठभूमि…अनुरक्त्ति,
शब्द अपने आप में…अभिव्यक्त्ति,
मौन…………………… व्यक्त्ति है।
गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
साधना की पृष्ठभूमि…….विरक्त्ति,
आराधना की पृष्ठभूमि…अनुरक्त्ति,
शब्द अपने आप में…अभिव्यक्त्ति,
मौन…………………… व्यक्त्ति है।
गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
4 Responses
व्यक्ति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के सर्वप्रथम आराधना की पृष्ठभूमि होकर, उसके उपरांत साधाना का मार्ग अपनाना परम आवश्यक है।
Can meaning of the last line be explained , please ?
ऐसा लगता है कि महाराज जी का अभिप्राय रहा होगा कि मौन रहना व्यक्ति की पहचान है।
आचार्य श्री से जब प्रश्न किया… क्या साधु रात्रि में बोल सकते हैं ?
साधुओं को तो दिन में भी नहीं बोलना चाहिए।
Okay.