बर्तनों को शुद्ध, राख से करते हैं।
आत्मा को गुरु/ भगवान की “चरण-रज” से।
भगवान की “चरण-रज” कैसे मिले ?
भगवान के गंधोदक से (स्नान का जल जो उनके चरणों का स्पर्श करके आता है)।
चिंतन
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शुद्धता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आत्मा को शुद्धता रखने के लिए भगवान् एवं गुरुओं के चरण रज लेना परम आवश्यक है। इसके लिए दोनों पर श्रद्धान रखना परम आवश्यक है।
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शुद्धता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आत्मा को शुद्धता रखने के लिए भगवान् एवं गुरुओं के चरण रज लेना परम आवश्यक है। इसके लिए दोनों पर श्रद्धान रखना परम आवश्यक है।