श्रावक का नम्बर 99 होता है, 2 अंकों वाला, सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान (अपूर्ण)। 99 के फेर में लगे रहते हैं।
श्रमण का 100, तीन अंकों वाला (सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यक् चारित्रधारी(पूर्ण))।
मुनि श्री मंगलानंद सागर जी
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श्रावक एवं श्रमण को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अच्छे श्रावक बनने का प़यास करना परम आवश्यक है।
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श्रावक एवं श्रमण को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अच्छे श्रावक बनने का प़यास करना परम आवश्यक है।