आचार्य श्री विद्यासागर जी ने संवर मार्ग छठे गुणस्थान से माना है क्योंकि सही में संवर तो गुप्ति, समिति से होता है,
हालाँकि संवर की शुरुआत तो दूसरे गुणस्थान से हो जाती है।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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संवर मार्ग को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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संवर मार्ग को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।