समय
दिन
कब बीते हैं…
सिर्फ हम बीत जाते हैं ।
घड़े फूटे भर हों
स्वयं रीत जाते हैं….
ऐलक श्री सम्यक्त्वसागर जी
दिन
कब बीते हैं…
सिर्फ हम बीत जाते हैं ।
घड़े फूटे भर हों
स्वयं रीत जाते हैं….
ऐलक श्री सम्यक्त्वसागर जी
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3 Responses
Sabhi ko samay ka dhyaan rakhana hoga; tabhi aap kuch kar sakte hain.
Can the meaning of the last 2 lines be explained please?
समय/दिन कहाँ समाप्त होते हैं!
हम/हमारी आयु कम होते होते समाप्त हो जाती है ।
जैसे crack वाला घड़ा रिसते रिसते खाली हो जाता है ।