जब बुद्धि को विश्राम देते हैं तो सर्वोत्तम निकलता है क्योंकि आत्मज्ञान Takeover कर लेता है।
चाहे संगीत हो या परमार्थ।
भगवान जब श्रेणी माढ़ते हैं तब तीर्थंकर प्रकृति का अनुभाग सर्वोत्तम हो जाता है।
चिंतन
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सर्वोत्तम को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए परमार्थ क्षेत्र में सर्वोत्तम बनने का प़यास करना परम आवश्यक है।
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सर्वोत्तम को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए परमार्थ क्षेत्र में सर्वोत्तम बनने का प़यास करना परम आवश्यक है।
भगवान जब श्रेणी माढ़ते हैं तब kya बुद्धि ke jagah kya आत्मज्ञान Takeover कर लेता है ? Ise clarify karenge, please ?
सही, श्रेणी के अंत में तो पूरा आत्मज्ञान टेकओवर कर लेगा, श्रेणी चढ़ते समय उसकी बहुलता धीरे-धीरे बढ़ती जाती है।
Okay.