साधना
सिद्धि के लिये साधना होती है।
लेकिन इसके आगे यदि “प्र” लग गया तो साधना प्रसिद्धि के लिये होने लग जाती है, सिद्धि छूट जाती है।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
सिद्धि के लिये साधना होती है।
लेकिन इसके आगे यदि “प्र” लग गया तो साधना प्रसिद्धि के लिये होने लग जाती है, सिद्धि छूट जाती है।
आचार्य श्री विद्यासागर जी