साधना
सिद्धि के लिए साधना होती है।
लेकिन इसके आगे यदि “प्र” लग गया तो साधना प्रसिद्धि के लिए होने लग जाती है, सिद्धि छूट जाती है।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
सिद्धि के लिए साधना होती है।
लेकिन इसके आगे यदि “प्र” लग गया तो साधना प्रसिद्धि के लिए होने लग जाती है, सिद्धि छूट जाती है।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने साधना को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु सिद्बी के लिए साधना करना परम आवश्यकता है। जीवन में साधना सिर्फ प़सद्भि के करना अनुचित है, इससे सिद्बी मिलना मुश्किल है।
Yahan par ‘सिद्धि’ ka meaning explain karenge, please ?
सिद्धि यानी अभीष्ट चीज को प्राप्त करना और उसमें मोक्ष/ सिद्ध भगवान/ सिद्ध अवस्था को प्राप्त करना भी हो सकता है या कोई सांसारिक सिद्धि भी हो सकती है। लेकिन सांसारिक सिद्धि के लिए भी यदि प्रसिद्धि के पीछे पड़ गए तो फिर वह सिद्धि प्राप्त नहीं होगी चाहे वह संसारी हो या पारमार्थिक।
Okay.