सामायिक आदि
सामायिक— समता संबंधी, श्रमणों के जीवन में, बारह और वैराग्य भावना आदि के द्वारा संसार के सही स्वरूप का चिंतन करना।
सामयिक— समय संबंधी, श्रावकों के जीवन में, सीमित समय को समता वालों का ध्यान करके खुद समता वाला बनना।
ध्यान—अशुभ से शुभ तथा शुभ से शुद्ध की ओर जाने को एक विषय पर केंद्रित होना।
आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा—ध्यान का फल क्या होता है ?
फल की ओर दृष्टि को रोक पाना ही ध्यान का फल है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 31 जुलाई)



