स्थितिकरण

निश्चय में…. उन्मार्ग की ओर जाते हुये अपने मन को सन्मार्ग में स्थित करना स्थितिकरण है ।
व्यवहार में…. वात्सल्य के साथ टूटे-फूटे शब्द भी दूूूूसरों के काम  आजाते हैं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

Share this on...

4 Responses

  1. स्थितिकरण का मतलब जो जीव धर्म से विचलित होते हैं , उनको धर्म में सुदृढ़ करने का नाम है।
    अतः उपरोक्त कथन सत्य है कि निश्चय में उन्मार्ग की ओर जाते हुए सन्मार्ग में स्थित करना स्थितिकरण है। व्यवहार में वात्सल्य के साथ टूटे फ़ूटे शब्द भी दूसरों के काम आ जाते हैं। स्थितिकरण सम्यग्दर्शन का एक अंग है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions. *Captcha loading...

Archives

Archives
Recent Comments

October 17, 2021

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930