Month: February 2025
मन
मन को कैसे समझें/ नियंत्रण में लें ? मन के विषय बाहरी (कषाय, इंद्रिय विषय) होते हैं, उनको समझें/ उनकी खुराक कम कर दें ।
मौन
शब्द पंगु हैं, जबाब न देना भी लाजबाव है। आचार्य श्री विद्यासागर जी
ब्रह्मचर्य
संत सुकरात से शिष्य ने पूछा – कम से कम कितने दिनों का ब्रह्मचर्य रखना चाहिये ? एक दिन छोड़ कर जीवन पर्यंत का। मन
पुण्योदय में पाप
पापोदय में पाप करते हैं यह तो समझ में आता है पर पुण्योदय में भी पाप करते हैं इसका क्या कारण ? सुभाष – महगांव
संस्थान / दीक्षा
चौथे काल में किसी भी संस्थान वालों को दीक्षा दे दी जाती थी, पर पंचम काल में नहीं। मुनि श्री सौम्य सागर जी- 11 फरवरी
अति योजना
दूर बुद्धि* भी एक प्रकार की दुर्बुद्धि है। * बहुत ज्यादा और बहुत दूर की प्लानिंग करना। – ब्र डॉ नीलेश भैया जी
आत्मा का वर्ण
आत्मा का कोई वर्ण नहीं होता। कथंचित् कारण –> आत्मा में लेश्या नहीं होती (वर्ण/ लेश्या, कर्म वर्गणाओं से ही होती है)। लेश्या नहीं, तो वर्ण
सकारात्मक सोच
संसार की बनावट है कि अभाव और उपलब्धि साथ-साथ चलती हैं। एक खरगोश किसान के खेत से रोज गाजर खाता था। बाड़ लगाने पर रोज
पुरुषार्थ और नियति
पुरुषार्थ का अर्थ प्रयत्न नहीं, अपितु पुरुष का उद्देश्य है। आत्मा ही हो प्रयोजन जिसका वह पुरुषार्थ है, यही नियति है। अपने में ही पुरुषार्थ
चेतना / शरीर
हम सब उत्पाद हैं, चेतना + पदार्थ (शरीर) के। चेतना, विचारपन देती है/ चाहना बढ़ाती है, गणित लगाती है, दुःख की निमित्त(कारण) है*। पदार्थ… विस्तारपना
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