Month: September 2025
वैभव
पुण्य से वैभव मिलता है, जमा होने पर परिग्रह/पाप रूप कैसे हो जाता है? वैभव पुण्य कर्म-फल है। जमा करने पर उससे मोह हो जाता
शून्यता
लालची सब कुछ भरता जाता है क्योंकि उसके अंदर शून्यता/ अभाव है। सिद्ध भगवान परम शून्य हैं (कोई चाह नहीं बची)। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
उन्नति
उन्नति आगे बढ़ना नहीं, ऊपर उठना है। अवरोध आने पर पानी ऊपर उठता है। हमारे जीवन में भी व्यवधान आयें तो उनको हटाने में अपनी
कर्ता
मैं कर्ता हूँ … मन से विचारों का, वचन से शब्दों का, काय से अपने कर्मों का। मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी
सकारात्मक सोच
पॉजिटिव थिंकिंग यह नहीं कि “मैं कर ही लूंगा” बल्कि वह जिसका रियलिस्टिक थिंकिंग से तालमेल हो। जैसे इंटरव्यू में “मैं क्लियर कर ही लूंगा”
भगवान् महावीर की शेर पर्याय
भगवान् महावीर को शेर पर्याय में जब सम्यग्दर्शन हुया तब वे हिमवन पर्वत पर थे। पर्वत के किस भाग में, भोगभूमि या कर्मभूमि में ?
मान / सम्मान
बीज को मुट्ठी में पकड़े रहने से उसकी सुरक्षा नहीं/ उसकी संतति नहीं। माटी को मान देने से मान रूपी बीज जब अपना मान समाप्त
विचय
अपाय/ उपाय विचय चौथे गुणस्थान में नहीं होता। जो खुद दुखों से बचने का उपाय नहीं कर रहा, वह दूसरों को बचाने का क्या/ क्यों
धन्यवाद
पहला धन्यवाद परमात्मा को जो हमारे आदर्श और लक्ष्य है। 2) गुरु को जिन्होंने बताया परमात्मा कौन होते हैं और उन तक कैसे जाया जा
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