Month: September 2025
भोगभूमि की घास
Napier घास गन्ने जैसी मीठी तथा दिखने में भी गन्ने जैसी गांठों वाली। गाय को प्रिय तथा स्वास्थ्यवर्द्धक। नामदेव – अहमदाबाद भोगभूमि में इसी तरह
पापात्मा
जो पाप क्रियाओं में आनंद लें और पुण्य क्रियाओं को बोझा मानें, वे पापात्मा। चिंतन
क्रिया और कार्य
हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है जैसे भक्ति से सुंदर शरीर मिलना। क्यों मिलता है ? भक्ति में गुणों की सुंदरता से आकर्षित होकर गुणानुवाद
हक़ीक़त
एक खगोलविद सड़क पर चलते-चलते तारों को देखे जा रहा था। खुले गटर में गिर गया। आसमानी संभावनाओं / ज्ञान से पहले ज़मीनी हक़ीक़तों को
शिविर के महत्वपूर्ण बिंदु
शिविर में 10 दिन रहकर यह महसूस किया होगा कि कितनी चीजें/ क्रियाएं और व्यवहार घर पर अनावश्यक करते थे ! जब उनके बगैर काम
शिविर से सीख
शिविर में हम कितने धार्मिक हैं उससे ज्यादा ज्ञान यह प्राप्त किया होगा कि हम कितने अधार्मिक थे। धीरे-धीरे शिविर की सीखें कम होंगी पर
शिविर समापन
जीवन विकास के 10 दिवसीय शिविर के समापन पर संबोधन… बहुत से पुरस्कारों में पुरुष और महिलाओं के लिए एक-एक था, शिविर-चक्रवर्ती जिन्होंने पाँच इंद्रिय
शिविर समापन समारोह
जीवन विकास के 10 दिवसीय शिविर के समापन पर संबोधन करते हुए कहा… व्यवस्थाएं चुस्त भी, सुस्त भी रहीं पर कुल मिलाकर मस्त रहीं। अपने
उत्तम ब्रह्मचर्य
जिनमें सब पूजायें तथा 10 धर्म मूर्ति रूप में दिखते थे, उनका नाम था आचार्य श्री विद्यासागर जी। वे तंत्र थे जिनको याद करके मन
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
जो आत्मा में विचरण करता, वह इंद्रियों के विचलन से बचता। इंद्रियों की दासता समाप्त होते ही आत्मा में विचरण शुरू हो जाता। देर तक
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