Month: October 2025

करणानुयोग

करणानुयोग का ज्ञान घृतवर समुद्र के जल जैसा यानी रागद्वेष नहीं। आगे के सब समुद्रों का जल इक्षु रस जैसा होता है। मुनि श्री प्रणम्यसागर

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आज़ादी

जीव की तरह बीज भी आज़ादी चाहता है। किसान के पुरुषार्थ बिना भी अंकुरित हो जाता है। 2 ग्राम का बीज टनोंटन माटी को हटाकर

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वास्तु

पत्नी का श्रृंगार पति के लिए वास्तु है। आपसी संबंधों को सही बनाए रखने में सहायक। मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 2 अगस्त)

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सामायिक आदि

सामायिक— समता संबंधी, श्रमणों के जीवन में, बारह और वैराग्य भावना आदि के द्वारा संसार के सही स्वरूप का चिंतन करना। सामयिक— समय संबंधी, श्रावकों

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क्रोध / सत्य

क्रोध में कही गई बात प्राय: सत्य के करीब होती है। ब्र. डॉ. नीलेश भैया (पर कहा तो यह जाता है कि नशे में आदमी

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अयोग केवली / नोकर्माहार

अयोग केवली के नोकर्माहार नहीं रहता तो शरीर कैसे चलता है ? आचार्य श्री विद्यासागर जी – पाप त्याग के बाद भी अल्प रहे संसार।

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माँ / पिता

“माँ” कहने पर मुँह खुल जाता है/ माँ के सामने ही मुँह खुलता है। स्वतंत्रता संग्राम में मुँह खोलने की पहल करने वालों के नाम

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दरार

बादलों में जरा सी दरार पड़ जाए तो बादल फट जाते हैं, सर्वनाश कर देते हैं। बच्चों से अपेक्षाएं/ बच्चों को सराहना की चाहत, दरार

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कुन्दकुन्द स्वामी / विदेह

कुन्दकुन्द स्वामी विदेह नहीं गये थे। यहीं से भावों से वंदना की थी। गणधर जी ने आशीर्वाद दिया था। ऐलक श्री विवेकानन्दसागर जी

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मंगल आशीष

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October 26, 2025