Month: October 2025
देवों का नरक भ्रमण
क्या सीता का जीव सोलहवें स्वर्ग से नरक सम्बोधन के लिए गया था? भक्ति/प्रथमानुयोग के अनुसार कथन है, इसमें करणानुयोग को गौण कर दिया जाता
ज्ञान
आचार्य श्री विद्यासागर जी के गुरु, आचार्य श्री ज्ञान सागर जी कहा करते थे… ज्ञान व्यक्ति की शोभा बढ़ाता है, यदि चरित्र के साथ हो
अहमिन्द्रों की धर्म-चर्चा
अहमिन्द्रों की धर्म-चर्चा अनंतकाल तक बिना दोहराये कैसे संभव ? उनकी चर्चा का विषय प्रथमानुयोग होता है। महापुरुषों की संख्या अनंत सो चर्चा भी अनंतकाल
जीव दया
राजस्थान में 3 साल से सूखा पड़ रहा था। आचार्य श्री विद्यासागर जी ने 1008 गायों को जैसलमेर से ट्रेन द्वारा अमरकंटक बुलवाया, जहाँ आचार्य
अचल-प्रदेश
धर्म, अधर्म और आकाश के भी अचल-प्रदेश होते हैं। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जीवकांड-576 – 28 जून)
क्षयोपशम
कर्मों के एकदेश क्षय या उदयाभावी क्षय तथा एकदेश उपशम को क्षयोपशम कहते हैं। क्षुल्लक श्री जैनेंद्र वर्णी जी (कर्म सिद्धांत)
दूर के ढोल सुहावने
ऊपर से तो गंदा नाला भी सुंदर दिखता है, पास आने पर दुर्गंध/ गंदा; अंदर उतरने पर स्विमिंग पूल में भी घुटन होने लगती है।
अवज्ञा
बच्चे हों या ग्राहक, आपकी बात न सुनने, न मानने और अपनी ही तानने का क्या कारण है ? 1) अभक्ष्य भक्षण 2) अपशब्दों का
स्थिति
परिस्थिति जो “पर” में स्थित हो। यह आपके हाथ नहीं। लेकिन पूरा पुरुषार्थ करने तथा आशावान रहने से स्व-स्थिति बदल जाती है। तब परिस्थिति भी
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