जीव दया

राजस्थान में 3 साल से सूखा पड़ रहा था। आचार्य श्री विद्यासागर जी ने 1008 गायों को जैसलमेर से ट्रेन द्वारा अमरकंटक बुलवाया, जहाँ आचार्य श्री चातुर्मास कर रहे थे। आचार्य श्री ने पहाड़ी से 40 किलोमीटर उतरकर उन गायों की अगवानी की। किसानों से संकल्प-पत्र भरवा करके, उनको गायें भेंट कीं।
आचार्य श्री को हर्पीस हो गई थी। छोटा रास्ता जो रिस्की भी था, तीन-चार मुनियों के साथ 5-7 किलोमीटर पदयात्रा करते थे। एक-एक रात में इतनी करवटें बदलते थे कि शायद सालों में न बदली हों। नरकों की वेदना समझ में आ रही थी।

मुनि श्री निश्चिल सागर जी (प्रवचन – 1 जुलाई)

Share this on...

5 Responses

  1. जीव दया का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए जीव दया के भाव हमेशा रखना परम आवश्यक है। जैन धर्म का मूल सिद्धान्त है कि जीव दवा का भाव रखना अनिवार्य है।

  2. किसानों से kaisa संकल्प-पत्र bharwaaya tha ? Ise clarify karenge, please ?

    1. किसानों से संकल्प पत्र भरवाया था कि हम जिंदगी भर इनकी सेवा करेंगे और जब यह दूध देना बंद कर देंगी तब हम इनको कसाइयों को सौपेंगे नहीं, इनकी अपने माँ-बाप की तरह सेवा करेंगे और शायद नॉनवेज का त्याग भी कराया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions. *Captcha loading...

Archives

Archives
Recent Comments

October 10, 2025

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930