Month: October 2025

स्वाध्याय

स्वाध्याय को परम-तप तभी कहा जा सकता है जब प्रशमता परम-श्रेणी की हो। मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 27 जून)

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नियंत्रण

प्राय: व्यक्ति अपने से छोटे, बड़े तथा खराब सभी को नियंत्रित करना चाहता है लेकिन अपने को नहीं। किसी को सुधारना है तो पहले अपने

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कर्म/जीव कांड

कर्मकांड में मुख्यता से कसायपाहुड से विषय लिए गए हैं जबकि जीवकांड में षट्खण्डागम की मुख्यता है। मुनि श्री सौम्य सागर जी ( जीवकांड गाथा

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सीमा

सीमा के बाहर की उपलब्धि दुःखदायी बन जाती है। जैसे सर्दियों में ऊँचे पहाड़ पर चढ़ते समय गर्म कपड़े। अति सफाई के लिये बार-बार झाडू

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म्लेच्छ खण्ड

म्लेच्छ खण्ड में न सम्यक् धर्म है, न मिथ्या धर्म। (इसलिये वहाँ से आयी रानियों आदि को सम्यक् धर्म ग्रहण करने में दिक्कत नहीं होती

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सीख

मेडिकल विद्यार्थियों को शरीर रचना सिखाते समय डॉक्टर ने मुर्दे की नाक में उंगली डाली और चूसने लगा। पहली सीख – घृणा नहीं करना। तुम

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जिन शासन

जिनशासन तर्क-प्रधान नहीं, तर्क-संगत है । इसमें तर्क वितर्क नहीं चलते। मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 23 जून)

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अर्पिता नर्पित सिद्धे

अस्तित्व धर्म अस्ति को बताता है। नास्तित्व धर्म अन्य द्रव्यों से पृथक करता है पर रूपी नहीं होता है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र

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हर्र

हर्र एक बहुत गुणवान देसी औषधि है। अलग-अलग मौसमों में अलग-अलग चीजों के साथ प्रयोग करना चाहिए जैसे… 1) वर्षा ऋतु: श्रावण और भाद्रपद माह

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मंगल आशीष

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October 6, 2025