Month: February 2026
कर्म फलादि
आदिनाथ भगवान के महीनों के अंतराय (आहार में) को कर्म-फल मानें या कुछ और ? संयोग भी हो सकता है। पार्श्वनाथ भगवान के पिछले 10
चोरी का माल
चोर घोड़ा चुरा कर बेचने खड़ा हुआ। कीमत तो मालूम नहीं थी सो बहुत ज्यादा बता रहा था। ग्राहक लौट रहे थे। एक ने कहा
द्रव्य का महत्व
समवसरण में पहले गुणस्थान वाले मुनि भी 13वें गुणस्थान वाले केवलियों के साथ एक कोठे में ही बैठते हैं। जबकि चौथे, पाँचवें गुणस्थान वाले श्रावक
उत्कृष्ट / निकृष्ट
उत्कृष्टता की तीन श्रेणी* ——> 10, 16, 25% दान देने वाले। निकृष्टता की भी तीन श्रेणी** –> 90, 84, 75% समय/ ध्यान (भगवान/ गुरु/ शास्त्र
दान
“अनुग्रहार्थ स्वस्ताति सर्गो दानम्” अनुग्रह में दोनों पक्षों के गुणों में बढ़ोतरी। “स्वस्ताति” → स्व-धन के अतिसर्ग (त्याग) को दान कहते हैं। यहाँ धन या
सीख
खाओ-पीओ, चखो मत*। देखो-भालो, तको मत। हँसो-बोलो, बको मत। खेलो-कूदो, थको मत। मुनि श्री मंगलसागर जी * बार-बार खाना
यंत्र / मंत्र / तंत्र
यंत्र —> पौद्गलिक का सहारा जैसे स्पीकर। मंत्र —> अदृश्य शक्ति का सहारा लेकर कार्य करना। तंत्र —> भावात्मक शक्ति का सहारा लेकर कार्य करना।
वनस्पतियों की आवाज
Tel University Israel की Study के अनुसार पौधे Ultrasonic frequency में कीड़ों से Interact करते हैं। पानी की कमी/ उखाड़े जाने पर ये आवाज एक
उपयोग
क्षयोपशम का सम्यक् उपयोग सम्यग्दर्शन/ज्ञान को क्षायिक सम्यग्दर्शन/ज्ञान तक ले जाता है। मुनि श्री मंगलसागर जी मिथ्या उपयोग (जैसे हर समय T.V. आदि देखना) एकेंद्रिय
निस्पृहता
आचार्य श्री विद्यासागर जी को बताया –> आप सुबह 3-4 बजे से लेकर रात तक इतनी मेहनत करते हैं, एक ग्लास दूध ले लिया करिये,
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