Day: August 16, 2026

सम्यक् प्रकृति

मिथ्यात्व का रस अनंतगुणा हीन तब सम्यक् मिथ्यात्व। सम्यक् मिथ्यात्व का रस अनंतगुणा हीन तब सम्यक् प्रकृति। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 8/9)

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आत्मा

आत्मा गुब्बारे जैसी है… जन्म के समय बिंदु के आकार की। कर्मों के अनुसार आकार बढ़ता तथा Shape लेता जाता है। जैसे गुब्बारे में हवा

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मंगल आशीष

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