Month: September 2026
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
हमारी आत्मा ब्रह्म रूप और इसकी बाहरी तत्वों से रक्षा करना ब्रह्मचर्य-धर्म, रक्षा जागृत रहने से, संसार के रंगीन सपनों को देखते रहने में नहीं।
एकाग्रता
आचार्य श्री विद्यासागर जी से मैंने पूछा…सामायिक में एकाग्रता कैसे बढ़ाएँ? आचार्य श्री… ध्यान करो जो दिख रहा है, वह मैं नहीं, जो देख रहा
उत्तम आकिंचन्य धर्म
“कुछ भी मेरा नहीं” आकिंचन्य और इस भाव का आना आकिंचन्य-धर्म। भीड़ में रहकर अपने नीड़ में रहना आकिंचन्य। अनुलोम-विलोम में साँस का ग्रहण और
काल
चौथे काल में…. दिन, आँखें, बताने वाले भी। पंचम काल में… रात, न आँखें, बताने वाले भी नहीं। सूरदास-सूरदास को राह दिखा रहे हैं। निर्यापक
उत्तम त्याग धर्म
जीवन में संयम धारण करने के बाद त्याग के भाव आना चाहिए/ आते ही हैं। दान के लिए धन संग्रह समझदारी नहीं। यह तो ऐसा
अचित्त
अचित्त करने की विधि… अग्नि पक्व ही उत्कृष्ट मार्ग है। छिन्न भिन्न, क्षारीय पदार्थ मिलाकर करना सही नहीं। 2) रस रूप में लेना। श्री मूलाचार
उत्तम तप धर्म
“इच्छा निरोध: तप:”, आचार्य विद्यासागर जी कहते थे -> “अपेक्षा निरोध: तप:।” शरीर की वयस्कता उम्र से, मन की तप से। तप से रसायन आदि
आयु
आचार्य श्री विद्यासागर जी के आसपास के देव उनको आयु बता सकते थे, कि उनकी आयु कितनी शेष रह गई है ? आर. के. जैन
उत्तम संयम धर्म
कषायों को मंद करने के बाद ही सत्य प्रकट होता है और सत्य हाथ से फिसल न जाए उसके लिए संयम रखना पड़ता है/ संयम
संकट
पारसनाथ भगवान ने इतने संकट झेले कि आज हम लोगों के लिए संकटमोचक बन गए, ऐसे ही तप के प्रतीक बाहुबली भगवान। यही कारण है
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