कर्मबंध एक समय से ज्यादा समय लेता है, ऐसा नहीं। उसे मानें कि कर्मबंध पहले समय में कर रहा था,दूसरे समय में फिर कर्मबंध करने लगा क्योंकि दूसरे समय में जन्म ले लिया।ऋजुगति में समय बचा कहाँ! वह तो कुछ समय कहना है, इसलिए कहते हैं। जैसे विग्रह गति में अनाहरक रहता है जीव, लेकिन जब बगैर मोडे के जाता है तो आहारक कहा, सिद्धांत: गलत है। जीव ने पहले समय में आहार किया और दूसरे में फिर आहार करने लगा, बीच के समय में उसको अनहारक कहा।
4 Responses
कर्मबंध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
That means koi bhi ‘karmbandh’ ek samay se zyaada leta hai ? Ise clarify karenge,
please ?
कर्मबंध एक समय से ज्यादा समय लेता है, ऐसा नहीं। उसे मानें कि कर्मबंध पहले समय में कर रहा था,दूसरे समय में फिर कर्मबंध करने लगा क्योंकि दूसरे समय में जन्म ले लिया।ऋजुगति में समय बचा कहाँ! वह तो कुछ समय कहना है, इसलिए कहते हैं। जैसे विग्रह गति में अनाहरक रहता है जीव, लेकिन जब बगैर मोडे के जाता है तो आहारक कहा, सिद्धांत: गलत है। जीव ने पहले समय में आहार किया और दूसरे में फिर आहार करने लगा, बीच के समय में उसको अनहारक कहा।
Okay.