दो जुड़वां भाइयों के सब कुछ एक सा होते हुए भी,भाग्य अलग-अलग क्यों?
क्योंकि पूर्व संचित कर्म अलग-अलग होते हैं, जिन्हें कोई जानता नहीं।
फिर हम प्रतिस्पर्धा किस आधार पर कर सकते हैं !
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 18 मई)
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प़तिस्पर्धा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए प़तिस्पर्धा से बचना परम आवश्यक है।
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प़तिस्पर्धा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए प़तिस्पर्धा से बचना परम आवश्यक है।