मकर संक्रांति
आज के दिन(मकर संक्रांति) भरत चक्रवर्ती को सूरज के अकृतिम चैत्यालय की पूजा करने के लिए, आने में देर हो गयी। जल्दी में नदी में डुबकी लगाई और पूजा करते समय जल का अर्घ चढ़ाया।
जनता ने दोनों क्रियाओं को देखकर मकर संक्रांति को नदियों में नहाना और सूरज पर जल चढ़ाने की पद्धति अज्ञानवश शुरू कर दी।
निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी




One Response
मकर संक्रांति का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।