Category: वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर

उपदेश

उपदेश अपने देश (आत्मा) में आने के लिये होता है। आचार्य श्री विद्यासागर जी

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भगवान के दर्शन

1. अहम् शांत होता है, झुकना सीखते हैं। 2. दर्शन से/ उनकी मुस्कान से दुःख कम होते हैं, हम लेनदेन करके दुःख कम करते हैं,

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संगति

दुर्जनों से ही नहीं उनकी छाया से भी दूर रहना चाहिये। Safe-distance बना कर रखें। आचार्य श्री विद्यासागर जी

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नाम

नाम ज्यादा चाहोगे तो बदनाम के रूप में भी मिल सकता है। आचार्य श्री विद्यासागर जी

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निधि

आत्मा की सबसे बड़ी निधियाँ हैं – स्वाधीनता, सरलता और समता भाव। इन्हें अपन को ग्रहण करना है, Develop करना है। आचार्य श्री विद्यासागर जी

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भेदविज्ञान

यदि चावल और कंकड़ में भेद नहीं किया तो दांत टूट जायेंगे। (हित/ अहित, शरीर/ आत्मा में भेद नहीं किया तो जीवन टूट जायेगा) आचार्य

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जिनवाणी

जिनवाणी माँ हमें समझा रही है कि कब तक चारों गतियों में जन्म मरण करते रहोगे ? अन्य पदार्थों की चाह में यह भ्रमण अनंत

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धैर्य

उत्साह बढ़े उत्सुकता घटे सो महान धैर्य आचार्य श्री विद्यासागर जी

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मंगल आशीष

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