Category: वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
मन
आचार्य श्री विद्यासागर जी सुनाते थे… क्या हो गया समझ में, मुझको न आता, क्यों बार-बार मन बाहर दौड़ जाता। स्वाध्याय ध्यान करके मन रोध
पुरुषार्थ
आचार्य श्री विद्यासागर जी के पास एक किसान ने आकर प्रार्थना की पानी बरसाने का मंत्र दे दो। आचार्य श्री –> ज़मीन तैयार करो, पुरुषार्थ
नम्रता
बड़ों के प्रति नम्रता कर्तव्य है, तो हम-उम्र के प्रति विनय की सूचक, अनुजों के प्रति कुलीनता की द्योतक एवं सबके प्रति सुरक्षा है। आचार्य
किसके पीछे?
कौन किसके पीछे भागता है? घर वालों के पीछे पाप या पाप के पीछे घर वाले? बड़े तो पाप के पीछे ही भागते हैं इसलिये
मोह
क्रोध, मानादि AC Current हैं, Shock देते हैं। मोह DC, चिपका लेता है, जब तक पूरा न चूस ले। आचार्य श्री विद्यासागर जी
कितना ?
रिक्त को भरने की मनाही नहीं, अतिरिक्त में दोष है। फिर चाहे वह भोजन हो या धन। आचार्य श्री विद्यासागर जी
संकलन
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे… बांध-बांध कर क्यों रखना ! जब ख़ुद को बंध कर जाना ही है। अर्थी पर भी, कर्मों से भी
ब्रह्मचर्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी…. उधारी 40 वर्ष पुरानी हो जाये तो खाते में से निकाल देते हैं। शादी 40 साल तक नहीं हो तब तो
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