Competition / Cooperation

Competition(प्रतिस्पर्द्धा) में बहुत से अज्ञात कारण हैं जैसे पूर्व के कर्म(भाग्य),
जब कि Cooperation(सहकारिता) में लाभ ही लाभ हैं…
1) ईर्ष्या से बचोगे।
ईर्ष्या करते किससे हैं ? व्यक्ति से नहीं, व्यक्ति की सफलता से क्योंकि उसके असफल होने पर हम ईर्ष्या नहीं, दया भाव रखने लगते हैं।
जिससे ईर्ष्या करेंगे क्या वह चीज़ हमको मिलेगी ! यानी हमें सफलता नहीं मिलेगी।
2) अनुभव बढ़ता जाएगा।
3) कम मेहनत में ज्यादा सफलता मिलेगी।
4) सद्भाव रहेगा।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 18 मई)

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3 Responses

  1. Competition and Cooperation का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सहकारिता के भाव रखना परम आवश्यक है।

  2. इंसान को कभी भी अपने मुँह से, जाने या अनजाने में, खाने को लेकर गलत नहीं बोलना चाहिए, न ही खाने की निंदा करनी चाहिए।
    क्योंकि हमारे पास जो है, वह प्रभु की देन है और हमें अपने आप को बहुत खुशनसीब मानना चाहिए कि हमारे सिर पर प्रभु का आशीर्वाद है।

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