उत्तम संयम धर्म
कषायों को मंद करने के बाद ही सत्य प्रकट होता है और सत्य हाथ से फिसल न जाए उसके लिए संयम रखना पड़ता है/ संयम की बाढ़ लगानी पड़ती है।
संयम बांधता नहीं बल्कि हमारी गलत धारणाओं से हमें निर्बंध करता है।
संयम दो प्रकार का… एक इंद्रिय संयम (पांचों इंद्रियों को नियंत्रण में रखना), दूसरा प्राणी संयम (प्राणियों की रक्षा, हमारे द्वारा उनका घात ना हो)।
जिसे अपनी जीभ पर नियंत्रण है, उसका जीवन पर नियंत्रण रहता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी



