उपकार
सबसे ज्यादा उपकार तो हम पर एकेन्द्रिय जीव ही करते हैं। मनुष्य सबसे ज्यादा अपकार/ दोहन इन्हीं एकेन्द्रियों का करता है।
लेकिन जो व्यक्ति दूसरों के उपकार में ही लगा रहता है (अपने उपकार का ध्यान नहीं रखते) उनके एकेन्द्रिय बनने की संभावना अधिक होती है।
(आगम का सिद्धांत नहीं, एक विचार है, एक संदेश है।)-चिंतन




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उपकार का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। मनुष्य को उपकार करना परम आवश्यक है।