कर्म को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु कर्म ऐसे करो कि कर्म काटने की आवश्यकता नहीं होना चाहिए। जीवन में कर्म ऐसे करो कि भुगतना की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। Reply
One Response
कर्म को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु कर्म ऐसे करो कि कर्म काटने की आवश्यकता नहीं होना चाहिए। जीवन में कर्म ऐसे करो कि भुगतना की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।