Day: May 22, 2026

उपयोग

श्रावक श्रमण की तुलना में अधिक सत्य बोलते हैं। कैसे ? श्रावक से पूछो, “बुख़ार है?” श्रावक- “है।” किन्तु श्रमण कहेगा, “नहीं।” “पर शरीर तो

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कर्म

कर्म कटते हैं, जगने से। बंधते हैं, सोने से। मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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मंगल आशीष

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