बौद्ध मत का पाँचवाँ शील बताया है…. मद्यपान-विरति,
जैन दर्शन में पाँचवाँ……………………………… अपरिग्रह।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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4 Responses
पंचशील का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जैन दर्शन में अपरिग्रह का महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अपरिग्रह रखना परम आवश्यक है।
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पंचशील का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जैन दर्शन में अपरिग्रह का महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अपरिग्रह रखना परम आवश्यक है।
‘मद्यपान-विरति’ ka meaning clarify karenge, please ?
त्याग, विरक्ति हो जाना।
Okay.