बंध के हेतु
बंध के हेतु….
सिद्धान्त ग्रंथों के 3 हेतु…राग, द्वेष, मोह।
अन्य ग्रन्थों में 4 हेतु……. मिथ्यात्व, अविरति, कषाय, योग।
तत्त्वार्थ सूत्र में 5 हेतु……. मिथ्यात्व, अविरति, प्रमाद, कषाय, योग।
अन्य ग्रंथकारों ने प्रमाद को अविरति या कषाय में गर्भित कर लिया है।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 8.1)




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बंध के हेतु का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए बंधन से बचने के लिए राग,द्बेष,मोह,कषाय, मिथ्यात्व एवं प्रमाद से बचना परम आवश्यकता है।