देह को तो राख बनना ही है।
तो क्या राख से राग रखना समझदारी होगी !
आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी
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राग को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु शरीर में राग रखनें से बचना चाहिए एवं राग रखनें के लिए भगवान् एवं गुरुजनों पर रखना परम आवश्यक है।
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राग को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु शरीर में राग रखनें से बचना चाहिए एवं राग रखनें के लिए भगवान् एवं गुरुजनों पर रखना परम आवश्यक है।