लब्धि

पहले क्षयोपशम-लब्धि, इसमें अपनी कमजोरियों/पाप की लिस्ट बनाना । उस लिस्ट को लेकर गुरु के पास जाओगे तब वे देशना देंगे । वह देशना शिष्य के लिए देशना-लब्धि बन जाएगी । गुरु का समय शिष्य की बुराइयों की चर्चा में बर्बाद ना करें, उनसे तो पुण्य बढ़ाने/व्रती बनने की शिक्षा/उपदेश लें ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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One Response

  1. लब्धि का तात्पर्य तप विशेष से प्राप्त होने की रिद्धि कहते हैं। अतः उपरोक्त कथन सत्य है कि पहिले क्षयोपशम लब्धि, इसमें अपनी कमजोरियां और पाप की लिस्ट बनाना चाहिए। उस लिस्ट को गुरु के पास जाने पर तब वह देशना देंगे। अतः अपना समय बुराईयों की चर्चा में न रहकर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए बल्कि अपने पुण्य बढ़ाने के लिए वृती बनने के लिए गुरुओं से शिक्षा एवं उपदेश लेना परम आवश्यक है ताकि जीवन का कल्याण हो सकता है।

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