सुख-दु:ख तथा आदत में क्या संबंध है ?
गरीब को महल में नींद नहीं दुखी, अमीर झोंपड़ी में नींद नहीं तो दुखी।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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सुख-दुख/आदत को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सुख दुःख में समता का भाव रखना परम आवश्यक है। जीवन में बुराईयां की आदत से बचना परम आवश्यक है।
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सुख-दुख/आदत को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सुख दुःख में समता का भाव रखना परम आवश्यक है। जीवन में बुराईयां की आदत से बचना परम आवश्यक है।