असाढ़ माह के प्रभाव

आषाढ़ के माह में (जो आजकल चल रहा है) नमी बहुत होती है, त्वचा के रोमों से वायु के साथ* नमी अंदर भी चली जाती है। उससे जठराग्नि मंद पड़ जाती है।
नतीजा ! दर्द, जकड़न,वायु, किडनी संबंधित रोग। क्योंकि जठराग्नि कम होने से भोजन पचता नहीं पर हम अज्ञानतावश पूरा खाना चाहते हैं, भूख जागृत करने के लिए चाट पकोड़ी खाने लगते हैं।
नतीजा ! पेट में वायरस/ बैक्टीरिया और वायु पैदा होने लगती है। इसीलिए आयुर्वेद में कहा है… इस माह में शारीरिक परिश्रम ज्यादा जैसे मुनिराज लंबे-लंबे विहार करते हैं और व्रत उपवास करने चाहिए।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 24 जून)

* सर्दियों में तो पंखे चलते ही नहीं, गर्मियों में गर्म हवा देने लगते हैं इसलिए कम स्पीड पर चलते हैं।

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4 Responses

  1. असाढ माह के प़भाव का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए असाढ के माह में शुद्ध भोजन, व़त, उपवास एवं व्यायाम करना परम आवश्यक है।

  2. ‘सर्दियों में तो पंखे चलते ही नहीं, गर्मियों में गर्म हवा देने लगते हैं इसलिए कम स्पीड पर चलते हैं’; Is
    sentence ka meaning clarify karenge, please ?

    1. सर्दी और गर्मी में पंखे का यह इफेक्ट क्यों नहीं होता, यह कह रहे हैं कि सर्दियों में पंखे चलते नहीं और गर्मियों में गरम हवा की वजह से चलते भी हैं तो बहुत कम स्पीड में।
      मुझे मालूम था कि तुम यह प्रश्न करोगी। इसीलिए मैंने पहले ही महाराज जी से यह क्लेरिफिकेशन करवा लिया था।

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