अहंकार
अहंकार…
राजा भोज के दरबार में एक ज्ञानी ने कोरे कागज पर बिना कुछ लिखे बताया कि इस कागज पर एक सुंदर कविता लिखी है।
पर दिखेगी उसी को जो पवित्र होगा।
सबने कहा बहुत सुन्दर-बहुत सुन्दर।
क्षु. सहजानंद जी
अहंकार…
राजा भोज के दरबार में एक ज्ञानी ने कोरे कागज पर बिना कुछ लिखे बताया कि इस कागज पर एक सुंदर कविता लिखी है।
पर दिखेगी उसी को जो पवित्र होगा।
सबने कहा बहुत सुन्दर-बहुत सुन्दर।
क्षु. सहजानंद जी