तीन परिस्थितओं में तीर्थंकर जन्म लेते हैं….
1) आचरण का विनाश हो रहा हो।
2) मिथ्यादृष्टिओं की लक्ष्मी और ख्याति बढ़ रही हो।
3) जैन धर्म के प्रति घृणा भाव आ रहा हो।
श्री पद्मपुराण (आर्यिका श्री पूर्णमति माता जी – 9 फरवरी)
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आर्यिका श्री पूर्णमती माता जी ने तीर्थंकर को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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आर्यिका श्री पूर्णमती माता जी ने तीर्थंकर को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।