भक्ति करने से गुणों से जुड़ जाते हैं, प्रसन्नता/ विनम्रता आती है। जिसकी भक्ति की जाती है उसके गुण आने लगते हैं। बहुश्रुतवान की भक्ति प्रत्यक्ष या परोक्ष में करने से श्रुत ज्ञान बढ़ता है।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
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4 Responses
भक्ति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः भगवान् एवं गुरुजनों की भक्ति से प्रसन्नता एवं विनम्रता अवश्य आती है। इसके अतिरिक्त उनके गुणों का अनुभव भी होता है।
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भक्ति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः भगवान् एवं गुरुजनों की भक्ति से प्रसन्नता एवं विनम्रता अवश्य आती है। इसके अतिरिक्त उनके गुणों का अनुभव भी होता है।
‘बहुश्रुतवान’ ka kya meaning hai, please ?
जिनको श्रुत पूरा आता है।
Okay.