नया व्यक्ति गाँव में पहुँचा।
पूछा –> यहाँ के लोग कैसे हैं ?
मैं ही ईमानदार हूँ (पूरे गाँव के बारे में कथन हो गया)।
दूसरे से पूछा –>
मैं भी ईमानदार हूँ (इसमें भी पूरा कथन हो गया)।
पहले वक्तव्य में घमण्ड, दूसरे में विनम्रता। फ़र्क सिर्फ “ही” और “भी” का है।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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वाकपटुता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु वाकपटुता में विऩम़ता एवं शालीनता रखना परम आवश्यक है।
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वाकपटुता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु वाकपटुता में विऩम़ता एवं शालीनता रखना परम आवश्यक है।