आत्मा शरीर के माध्यम से भोग करती है। तभी तो शरीर पर चींटी, अनुभव आत्मा करती है।
आत्मा निकलने के बाद बिच्छू भी काट ले तो अनुभव नहीं।
प्रश्न… फिर मरने पर “राम/ अरिहंत नाम सत्य” क्यों सुनाते हैं ?
मुर्दे को नहीं, ले जा रहे लोगों को सुनाते हैं।
चिंतन
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2 Responses
शरीर/आत्मा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आत्मा को पहिचान कर श्रद्बान करना परम आवश्यक है। जब श्रावक को मरनैं के बाद आत्मा निकल जाती है, तब शरीर में कुछ जान नहीं रहती है।
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शरीर/आत्मा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आत्मा को पहिचान कर श्रद्बान करना परम आवश्यक है। जब श्रावक को मरनैं के बाद आत्मा निकल जाती है, तब शरीर में कुछ जान नहीं रहती है।
Bahut hi accha chintan hai !