आचार्य श्री ज्ञानसागर जी* फल (धर्म-पुरुषार्थ) खाकर चले गए।
गुठली भी बोई (आचार्य श्री विद्यासागर जी)/ पौधे को सँवारा, विकसित भी कर गए।
जिस पर आज अनेकों सुगंधित फल/ फूल लग रहे हैं।
चिंतन
* आचार्य श्री विद्यासागर जी के गुरु।
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स्व-पर कल्याण को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए धर्म पुरुषार्थ करना परम आवश्यकता है।
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स्व-पर कल्याण को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए धर्म पुरुषार्थ करना परम आवश्यकता है।
Param Pujya आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ke param pawan charno me shat shat naman !
Namostu Gurudev !