अहिंसा / हिंसा
दसलक्षण धर्म के प्रथम दिवस उत्तम-क्षमा की बधाई,
सबसे क्षमा भाव।
दृष्टि-संयम का पालन करें। लाभ…जीवों की रक्षा, ठोकर न लगना, विकारों का ना आना, आँख की धूल से रक्षा।
अब शेर की दहाड़ हिंसा करने के लिए नहीं, हिंसा करते हुए जीवों को दहलाने के लिए।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (तत्वार्थ सूत्र – 7/14)
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पार्टी आदि में अनर्गल प्रवृत्ति करते समय सुख लगता है, तो ग़लत क्या ?
आपकी प्रवृत्ति से दूसरों को दु:ख/ अशांति, यह ग़लत हुआ/ हिंसा हुई।
ख़ुद की आत्मा का घात होने से अंतरंग हिंसा भी।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्वार्थ सूत्र – 7/14)




2 Responses
हिंसा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जीवन में हिंसा से बचने हेतु दूसरों को दुःख देना,अशान्ती फेलना,गलत प़वृत्ति करना आदि से बचना परम आवश्यक है। ख़ुद की आत्मा का घात से बचना परम आवश्यक है। अतः जीवन के कल्याण हेतु भगवान् श्री महावीर स्वामी ने अहिंसा का उपदेश दिया गया था,उसका पालन करना परम आवश्यक है।
Bahut hi accha post hai ! Dono Gurudev ke charnon me shat shat naman !